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Showing posts from October, 2019

खुदा मुझसे मां की मोहब्बत न छीने

Dr.IMRAN PRATAPGARHI  तेरी हर बात चल कर यूं ही मेरे जैसे आती है तेरी याद की खुशबू किसी हिचकी से आती है आती है तेरी बदन से मां वही खुशबू जो एक पूजा के दीपक में पिघलते घी से आती है। बहुत रोते हैं पर दामन हमारा कभी नम नहीं होता। इन आंखों के बरसने का कोई मौसम नहीं होता हमेशा दुश्मनों के बीच महफूज रहता हूं क्योंकि मां की दुआओं का खजाना कभी कम नहीं होता। खुदा मुझसे मां की मोहब्बत न छीने   अगर छीनना है जहां छीन ले वो  जमीन छीन ले आसमा छीन ले वो   मेरे  सरकी बस एक यह छत न छीने   खुदा मुझसे मां की मोहब्बत न छीने -2 कि अगर मां  ना होती जमीन पर ना आता जो आंचल न होता कहां सर छुपाता । मेरा लाल कहकर बुलाती है मुझको  कि खुद भूखी रहकर खिलाती है मुझको । ये दामन मेरा चाहे नाम कर दे जितना  वो बस आज मुझ पर करम कर दे इतना। जो मुझ पर हुई है इनायत न छीने । खुदा मुझसे मां की मोहब्बत न छीने-2 मुझे पाला पोसा बड़ा कर दिया है  कि पैरों पर अपने खड़ा कर दिया है । कभी जब अंधेरों ने मुझको सताया तो मां...